आओ हँस लें

आओ हँस लें

Wednesday

नंगा हुआ है दीवाना


वो गला फाड़ कर चिल्लाये
भूखे हो क्या ?
तो भीख क्यों नहीं मांगते
कमबख्त भिखमंगों से कौन मांगे
आज देंगे
कल मांगने  आ जायेंगे
इन्हें तो हर पाच साल में आना है
और कोई न कोई करतब दिखाना है
मदारियों की तरह उछलकूद लेंगे
एक दुसरे पर थूकेंगे
इसकी उसकी धोती उतारेंगे
पुदीने के पेड़ पर
दशहरी आम लगायेंगे
और कहेंगे
सेब खाओगे क्या ?
तैयार हो जाओ
बरसात बाद सेब की फसल आयेगी
और हम मुह बाये ही रहेंगे
ये हमारे बाग़ के सेब भी खायेंगे
और हमरी लगोटी भी उतार लेंगे
इसी लिए हम कहते है
" भैया जी अपनी चड्ढी को रखना सम्हाल
  ये नंगा हुआ है दीवाना "

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